पीहू और आसमान की फुसफुसाहट
आयु 6–8
रेगिस्तान की एक सुबह पीहू एक विशाल रेडियो टेलीस्कोप ऐरे की एक दिन की डायरेक्टर बनती है और तीस डिश को आसमान के लिए एक विशाल कान में सिंक करना सीखती है, फिर घर पर एक छोटा-सा देसी वर्ज़न बनाती है, जो असली मौसम-विज्ञानियों को सौर तूफ़ान समझने में मदद करता है।

पीहू वैन से उतरकर रेगिस्तान की खुली सुबह में आई। उसके जूतों के नीचे हल्की-सी सफ़ेद रेत कुरकुरा रही थी। तीस विशाल सफ़ेद डिश एक लंबी, मुड़ी हुई कतार में खड़ी थीं, चुपचाप, शांत, इंतज़ार करती हुई। “आज तुम डायरेक्टर हो,” डॉ. मीरा ने मुस्कुराकर कहा। “ध्यान से सुनना, तो आसमान जवाब देगा,” उन्होंने आगे कहा। पीहू के पेट में ख़ुशी की गुदगुदी हुई। क्या वह सच में तीस विशाल कानों से एक साथ सुन सकती थी?
कंट्रोल रूम के अंदर स्क्रीन पर लहरदार लकीरें टिमटिमा रही थीं। “रेडियो तरंगें अनदेखी लहरें होती हैं,” डॉ. मीरा ने कहा, “जैसे आवाज़, जो हमारे कानों की पहुँच से बहुत दूर तक फैल जाए।” पीहू ने एक बटन दबाया। घूँ! एक डिश जाग उठी और धीरे-धीरे घूमने लगी। “अकेली डिश सिर्फ़ फुसफुसाहट सुनती है,” उन्होंने कहा। “तीस मिलकर ज़ोर की पुकार सुनती हैं। ध्यान से सुनो!”
“हमारा निशाना,” डॉ. मीरा ने कहा, “एक न्यूट्रॉन तारा है। वह इतनी तेज़ घूमता है कि हर सेकंड में एक बार रेडियो किरण चमकाता है, दिल की धड़कन जैसी एकदम बराबर।” पीहू हैरान रह गई। “पूरा एक तारा, और ऐसे टिक-टिक करता है?” “तुम्हारी अपनी धड़कन से भी ज़्यादा बराबर,” वे हँस पड़ीं। “चलो, उसकी धड़कन पकड़ें। ध्यान से सुनो!”


