रोहन और आवाज़ों वाला तारों का पतंगा
आयु 6–8
रोहन को एक चमकता हुआ पतंगा मिलता है, जो दिन भर की खुशी भरी आवाज़ें इकट्ठा करके उन्हें तारों के एक नरम कंबल में बुन देता है।

सूरज धीरे-धीरे नीचे उतर गया और बग़ीचा मखमली नीला हो गया। रोहन पत्थर की बेंच पर बैठा था और सुन रहा था कि दुनिया कैसे धीरे-धीरे चुप हो रही है।
एक पतंगा, किसी नन्हे लालटेन की तरह चमकता हुआ, रोहन के हाथ पर आकर बैठ गया। वह एक गीत गुनगुना रहा था, जो गर्मियों की हल्की हवा जैसा लगता था।
पतंगा उड़ चला और पूरे बग़ीचे में चक्कर लगाने लगा। उसने पत्तों में छिपी एक खिलखिलाहट को पकड़ लिया, और एक चिड़िया की शाम की आख़िरी चहचहाहट को भी।


