मायरा और दिलों का छिपा बगीचा
आयु 6–8
जब मायरा को एक जादुई बगीचा मिलता है जहाँ पौधे उसके मन के मिज़ाज की तरह बदलते हैं, तो वह सीखती है कि सबसे चुभने वाली भावनाओं को भी खिलकर सुंदर बनने के लिए धैर्य चाहिए।

मायरा ने भारी लोहे का फाटक धकेलकर खोला। अंदर बगीचा एक अजीब, नरम रोशनी से गुनगुना रहा था। हर पत्ता झिलमिला रहा था, जैसे इंतज़ार कर रहा हो कि वह रास्ते पर चले।
तभी नुकीले, काले काँटों की एक झाड़ी काँप उठी। यह चिढ़ की झाड़ी थी। वह हिलती-डुलती और चुभती रही, और मायरा को अपने सीने के अंदर गहरे में एक चुभती-सी गर्मी महसूस होने लगी।
मायरा ने काँटों को परे धकेलने की कोशिश की। “रुक जाओ!” वह चिल्लाई। पर झाड़ी और ज़्यादा चुभने लगी। वह जितना लड़ती, काँटे उतना ही आगे बढ़कर उसके कपड़ों में अटक जाते।


