वीर और नन्हा हिम्मती बीज
आयु 3–5
जब वीर को लगता है कि उसके बगीचे में फूल बहुत धीरे खिल रहे हैं और वह बेचैन हो जाता है, तो वह सब्र और प्यार भरे हौसले का जादू सीखता है, और जान जाता है कि बड़ी चीज़ों को बढ़ने में समय लगता है।

वीर ने उँगली से मिट्टी को हल्के से कुरेदा। कुछ भी नहीं हुआ। उसने अपना बीज कल ही बोया था, पर मिट्टी का वह भूरा टुकड़ा अब भी बस चुप और खाली था।
उसे फूल अभी चाहिए था। इंतज़ार उसके सीने में एक भारी, गुदगुदाते बुलबुले जैसा लग रहा था। उसने लंबी साँस ली और मन ही मन चाहा कि बीज जल्दी से अंकुर बन जाए।
हवा में हल्की-सी गुनगुनाहट गूँजी। एक नन्ही मधुमक्खी गमले के किनारे पर आकर बैठ गई। वह जैसे कह रही थी कि सबसे बड़े सूरजमुखी भी पहले छोटे-छोटे, नींद में डूबे बीज ही होते हैं।


