रोहन और हरी-हरी बगिया
आयु 3–5
जब रोहन को बीजों का एक जादुई पैकेट मिलता है, तो वह सीखता है कि बगिया की देखभाल करने से हर सब्ज़ी अच्छे काम का एक स्वादिष्ट, कुरकुरा इनाम बन जाती है।

रोहन ने अपनी थाली में देखा। वहाँ एक नन्हा-सा हरा मटर रखा था। उसने उसे परे सरका दिया। “मुझे हरी चीज़ें अच्छी नहीं लगतीं,” रोहन ने रसोई की मेज़ से कहा। “ये तो बस कीड़ों के खाने की चीज़ें हैं।”
भिन्नू मधुमक्खी उड़ता हुआ रसोई में आ गया। वह मज़े से गुनगुना रहा था। “हरी चीज़ें तो जादुई होती हैं!” भिन्नू ने भिनभिनाकर कहा। “ये मिट्टी से उगती हैं और तुम्हें लंबा और ताकतवर बनाती हैं।”
भिन्नू रोहन को घर के पिछवाड़े ले गया। उसने उसे बीजों का एक पैकेट दिखाया। “ये सिर्फ़ हरी चीज़ें नहीं हैं,” भिन्नू ने कहा। “ये छोटी-छोटी सोई हुई बगिया हैं, जो तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं।”


