वीर और खोए हुए शब्दों की लाइब्रेरी
आयु 6–8
जब वीर को अटारी में एक धूल भरी जादुई किताब मिलती है, तो पहेलियाँ सुलझाने और घर का रास्ता ढूँढने के लिए उसे अलग-अलग भाषाओं में गिनती और नए शब्द सीखने पड़ते हैं।

धूल भरी अटारी में वीर को एक किताब मिली, जो किसी कैद किए हुए तारे की तरह चमक रही थी। जैसे ही उसने किताब का कवर खोला, कमरा घूम गया और एक ऐसी लाइब्रेरी बन गया जिसकी अलमारियाँ कभी खत्म ही नहीं होती थीं। “मैं कहाँ हूँ?” वीर ने धीरे से कहा और अपना मैग्निफाइंग ग्लास कसकर पकड़ लिया।
किताब कोई धुन गुनगुनाने लगी। तभी एक पत्थर का दरवाज़ा दिखाई दिया, जिस पर सुनहरे अक्षरों में एक पहेली लिखी थी: 'तारे गिनो, फिर कहो उनो।' वीर ने ऊपर देखा और छत पर चमकते तारे गिने: एक, दो, तीन। “उनो!” वीर ज़ोर से बोला।
रास्ता एक पुल तक ले गया, जिसकी रखवाली कागज़ के पंखों वाला एक दोस्ताना उल्लू कर रहा था। “पुल पार करने के लिए,” उल्लू ने हू-हू करके कहा, “तुम्हें स्पैनिश में दो तक गिनती बोलनी होगी। दोस!” वीर मुस्कुराया और आगे बढ़ा। “उनो, दोस!” वीर ने पूरे भरोसे से कहा।


