आरव और खोई हुई ज़बानों की लाइब्रेरी
आयु 6–8
जब आरव को एक जादुई लाइब्रेरी मिलती है, जहाँ शब्द नंबर वाले डिब्बों में छिपे हैं, तो वह जान जाता है कि गिनती और नई भाषाएँ ही हर दरवाज़ा खोलने की चाबियाँ हैं।

लाइब्रेरी फुसफुसाहटों से भरी थी। आरव ने अपनी पीतल की चाबी हाथ में पकड़ी और ऊँची-ऊँची अलमारियों को देखा। हर डिब्बे पर एक नंबर लिखा था। अगर वह उन्हें गिन सके, तो उन्हें खोल भी सकेगा।
उसे एक छोटा नीला डिब्बा मिला, जिस पर नंबर एक लिखा था। अंदर एक नन्हा-सा कार्ड रखा था, जिस पर “हैलो” कहने का एक नया तरीका लिखा था। “ओला,” कार्ड ने धीरे से कहा। आरव मुस्कुरा दिया। “ओला!”
फिर वह एक लाल डिब्बे के पास गया, जिसके ढक्कन पर नंबर दो लिखा था। अंदर दो चमकदार लाल चेरी रखी थीं और एक ऐसा शब्द, जो संगीत जैसा लगता था। “बोंजूर,” कार्ड ने कहा।


