आरव और बादल-सिलाई वाले पिप का तोहफ़ा
आयु 3–5
जब आरव को मैदान में एक नन्ही, चमकती सुई मिलती है, तो उसकी मुलाक़ात बादल-सिलाई वाले पिप से होती है, जो एक कोमल जीव है और आसमान के नरम किनारों को सिलने में मदद चाहता है, ताकि मीठी बारिश लौट आए।

फुसफुसाते मैदान के बीच, जहाँ घास पैरों में गुदगुदी करती है, आरव को मिट्टी में कुछ चमकता हुआ दिखा। वह एक नन्ही-सी चाँदी की सुई थी! उसने सुई उठाई, और अचानक आसमान एक धीमी, गुड़गुड़ाती-सी मीठी धुन गुनगुनाने लगा।
झाड़ी के पीछे से रोएँदार कानों वाला एक नन्हा जीव फुदकता हुआ निकला। यह पिप था, बादल-सिलाई वाला! "अरे नहीं!" पिप चीं-चीं करके बोला। "मेरी सुई! आसमान किनारों से उधड़ रहा है, और मैं इतना ऊँचा नहीं पहुँच पाता कि उसके नरम, नीले जोड़ फिर से सिल सकूँ।"
आरव ने उधड़ते हुए आसमान को देखा, जहाँ रुई जैसे बादल एक-दूसरे से दूर बहते जा रहे थे। "मैं मदद करूँगा," आरव ने कहा। उसके मन में बहुत हिम्मत थी। उसने उँगली पर बलूत के फल की नन्ही-सी टोपी पहनी और सुई को कसकर पकड़ लिया।


