कबीर और दाँतों के डॉक्टर के पास बहादुरी का दिन

आयु 3–5

जब कबीर को पता चलता है कि चेक-अप का समय हो गया है, तो वह जान जाता है कि बहादुर होने का मतलब है सवाल पूछना और डॉक्टर को अपनी मदद करने देना, ताकि उसकी मुस्कान चमक उठे।

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आज बड़ा खास दिन है! कबीर पहली बार दाँतों के डॉक्टर के पास जा रहा है। वह अपनी पसंदीदा कमीज़ पहनता है और उसके पेट में हल्की-सी गुदगुदी होने लगती है।

क्लिनिक में कमरा रोशन और प्यारा-सा है। दीवारों पर खुश जानवरों की तस्वीरें लगी हैं! कबीर बड़ी, मुलायम कुर्सी पर बैठता है। यह तो रॉकेट की सीट जैसी लगती है।

डॉक्टर मुस्कान प्यार से हाथ हिलाती हुई पास आती हैं। “नमस्ते कबीर! क्या तुम यह देखने के लिए तैयार हो कि हम तुम्हारे दाँतों को मज़बूत और चमकदार कैसे रखते हैं?” कबीर सिर हिलाता है। अब उसे बहुत अच्छा लग रहा है।

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